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तमिलनाडु BJP अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से क्यों दिया इस्तीफा? जानें IPS से लेकर नई राजनीतिक पार्टी बनाने तक की पूरी कहानी।
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K Annamalai Quits BJP: आईपीएस अफसर से 'सिंघम' और अब अपनी नई पार्टी तक की पूरी इनसाइड स्टोरी

तमिलनाडु की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। 'सिंघम' के नाम से मशहूर पूर्व आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. [span_0](start_span)Annamalai) ने आधिकारिक तौर पर भाजपा से इस्तीफा दे दिया है[span_0](end_span)। [span_1](start_span)5 जून 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है[span_1](end_span)।

अन्नामलाई सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि तमिलनाडु में एक 'युवा आइकन' माने जाते हैं। उनके इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है कि आखिर जिस नेता ने तमिलनाडु में भाजपा के वोट शेयर को ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचाया, उसे पार्टी क्यों छोड़नी पड़ी? ज़्यावार्ता (Zyvarta) के इस 'मेगा-आर्टिकल' में हम के. अन्नामलाई की पूरी जर्नी (Journey), आईपीएस के दिनों की कहानियां, उनका भाजपा में उतार-चढ़ाव और उनके भविष्य के 'नए राजनीतिक आंदोलन' (New Political Movement) की पूरी रूपरेखा विस्तार से डिकोड करेंगे।

K. Annamalai Political Timeline: पुलिस फोर्स से इस्तीफे तक का सफर

[span_2](start_span)
वर्ष 2011

IPS Officer (Karnataka Cadre)

यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा पास करके कर्नाटक कैडर में आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी सेवा शुरू की[span_2](end_span)。

मई 2019

Resigns from Police Force

बेंगलुरु साउथ के डीसीपी (DCP) पद से इस्तीफा दिया। [span_3](start_span)उनका कहना था कि वह जनता की सीधी सेवा करना चाहते हैं और सिस्टम की खामियों को दूर करना चाहते हैं[span_3](end_span)。

[span_4](start_span)
अगस्त 2020

Joined Bharatiya Janata Party

आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हुए और तमिलनाडु में पार्टी का युवा चेहरा बनकर उभरे[span_4](end_span)。

[span_5](start_span)
जुलाई 2021

Appointed TN BJP President

महज एक साल के भीतर, 16 जुलाई 2021 को उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष (State President) बना दिया गया[span_5](end_span)。

[span_6](start_span)
अप्रैल 2025

Stepped Down as President

गठबंधन और पार्टी की अंदरूनी राजनीति के चलते 11 अप्रैल 2025 को उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन (Nainar Nagenthran) को कमान सौंपी गई[span_6](end_span)。

2 जून 2026

Meeting with Amit Shah

दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह, बी.एल. [span_7](start_span)संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और इस्तीफा सौंप दिया[span_7](end_span)。

5 जून 2026

Official Exit & New Movement

इस्तीफा स्वीकार हुआ। [span_8](start_span)अन्नामलाई ने तमिलनाडु की जनता के लिए एक नया 'राजनीतिक आंदोलन' (New Outfit) शुरू करने की घोषणा की[span_8](end_span)。

1. कौन हैं के. अन्नामलाई? (Who is K. Annamalai?)

कुप्पुसामी अन्नामलाई का जन्म तमिलनाडु के करूर जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। [span_9](start_span)उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering) और एमबीए (MBA) की पढ़ाई की है[span_9](end_span)। [span_10](start_span)शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 2011 में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास की और कर्नाटक कैडर के आईपीएस (IPS) अधिकारी बने[span_10](end_span)।

कर्नाटक का 'सिंघम' (The Singham of Karnataka)

पुलिस महकमे में अन्नामलाई की छवि एक बेहद कड़क और ईमानदार अफसर की थी। [span_11](start_span)उनकी पहली पोस्टिंग कार्कल (Karkala) में बतौर एडिशनल एसपी हुई थी[span_11](end_span)। [span_12](start_span)इसके बाद उन्होंने उडुपी (Udupi) और रामनगर (Ramanagara) जिले में बतौर एसपी (SP) काम किया[span_12](end_span)। क्राइम को रोकने के उनके आक्रामक और बेखौफ तरीके के कारण लोग उन्हें कर्नाटक का 'सिंघम' कहने लगे थे। [span_13](start_span)2019 में जब वे बेंगलुरु साउथ के डीसीपी थे, तब उन्होंने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सिस्टम की कमियों को राजनीति के माध्यम से सुधारने का संकल्प लिया[span_13](end_span)।

2. भारतीय जनता पार्टी (BJP) में उनकी आक्रामक पारी

[span_14](start_span)

अगस्त 2020 में अन्नामलाई ने भाजपा का दामन थामा[span_14](end_span)। [span_15](start_span)उनकी लीडरशिप क्वालिटी को देखते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जुलाई 2021 में उन्हें तमिलनाडु राज्य का अध्यक्ष बना दिया[span_15](end_span)। अध्यक्ष बनते ही अन्नामलाई ने तमिलनाडु की पारंपरिक 'द्रविड़ राजनीति' को सीधे चुनौती देना शुरू कर दिया।

'DMK Files' और भ्रष्टाचार पर हल्ला बोल

  • अन्नामलाई ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (DMK) के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। [span_16](start_span)उन्होंने 'DMK Files' नाम से कई ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ जारी किए[span_16](end_span)।
  • इन फाइलों में मुख्यमंत्री एम.के. [span_17](start_span)स्टालिन के रिश्तेदारों और पूर्व वित्त मंत्री पलानीवेल थियागा राजन (Palanivel Thiaga Rajan) पर भारी वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया[span_17](end_span)।
  • इसके अलावा सेंथिल बालाजी और के. [span_18](start_span)पोनमुडी जैसे मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए[span_18](end_span)। [span_19](start_span)डीएमके ने पलटवार करते हुए अन्नामलाई पर ₹500 करोड़ का मानहानि का मुकदमा (Defamation Case) ठोक दिया[span_19](end_span)।

48 दिन का नंगे पैर उपवास (The Barefoot Protest)

अन्नामलाई का तरीका आम राजनेताओं जैसा नहीं था। [span_20](start_span)2024 में अन्ना विश्वविद्यालय (Anna University) में हुए यौन उत्पीड़न मामले के दौरान, डीएमके सरकार की कानून व्यवस्था का विरोध करते हुए उन्होंने खुद को कोड़े मारे (Self-flagellation)[span_20](end_span)। [span_21](start_span)उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक डीएमके को सत्ता से उखाड़ नहीं फेंकते, वे 48 दिनों तक नंगे पैर रहेंगे और उपवास करेंगे[span_21](end_span)। [span_22](start_span)बाद में उनके उत्तराधिकारी नैनार नागेंद्रन के अनुरोध पर अप्रैल 2026 में उन्होंने जूते पहनना दोबारा शुरू किया[span_22](end_span)।

3. चुनावी प्रदर्शन: हार के बावजूद वोट शेयर में ऐतिहासिक उछाल

अगर चुनावी जीत-हार की बात करें तो अन्नामलाई को व्यक्तिगत तौर पर सफलता नहीं मिली। [span_23](start_span)उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में अरावकुरुची (Aravakurichi) से और 2024 के लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर (Coimbatore) से किस्मत आज़माई, लेकिन दोनों जगह उन्हें हार का सामना करना पड़ा[span_23](end_span)। [span_24](start_span)कोयंबटूर में वे लगभग 1,10,000 वोटों के अंतर से हारे[span_24](end_span)।

[span_25](start_span)

लेकिन एक बड़ा ट्विस्ट था: अन्नामलाई के नेतृत्व में तमिलनाडु में भाजपा का वोट शेयर 2019 के 3.6% से बढ़कर 2024 में 11.2% हो गया था, जो भाजपा के लिए राज्य में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था[span_25](end_span)।

4. आखिर अन्नामलाई को बीजेपी क्यों छोड़नी पड़ी? (The Inside Story)

अन्नामलाई एकला चलो की नीति पर विश्वास करते थे। वे चाहते थे कि भाजपा द्रविड़ पार्टियों के सहारे के बिना अपने दम पर खड़ी हो। लेकिन यही विचार उनके लिए पार्टी छोड़ने का कारण बन गया:

AIADMK से गठबंधन टूटना और वापसी

  • अन्नामलाई ने एआईएडीएमके (AIADMK) के दिग्गजों सी.एन. अन्नादुरई और जे. [span_26](start_span)जयललिता की विचारधारा पर लगातार प्रहार किए[span_26](end_span)। [span_27](start_span)इससे नाराज़ होकर AIADMK ने सितंबर 2023 में एनडीए (NDA) गठबंधन छोड़ दिया था[span_27](end_span)।
  • अन्नामलाई ने AIADMK के महासचिव इडाप्पडी के. पलानीस्वामी (Edappadi K. [span_28](start_span)Palaniswami) को "अनपढ़" (Illiterate) तक कह दिया था और कहा था कि वे "सबसे ऊंची बोली लगाकर" नेता बने हैं[span_28](end_span)।[span_29](start_span)
  • 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा बिना AIADMK के उतरी और 39 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई[span_29](end_span)।

अध्यक्ष पद छिनना और 2026 विधानसभा चुनाव का परिणाम

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए AIADMK से दोबारा हाथ मिलाना चाहता था। [span_30](start_span)इसके लिए अप्रैल 2025 में अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को अध्यक्ष बना दिया गया[span_30](end_span)। [span_31](start_span)भाजपा ने AIADMK के साथ जूनियर पार्टनर के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन अन्नामलाई इस सीट-बंटवारे से बेहद नाखुश थे[span_31](end_span)। [span_32](start_span)

नतीजा यह हुआ कि हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 11% से गिरकर 3% से भी नीचे आ गया[span_32](end_span)। [span_33](start_span)इसके बाद अन्नामलाई को यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा के अंदर उनका कोई राजनीतिक भविष्य नहीं बचा है[span_33](end_span)।

5. अमित शाह से मुलाकात और नई पार्टी (Future Plans)

पार्टी छोड़ने से पहले, 2 जून 2026 को अन्नामलाई ने नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह, बी.एल. [span_34](start_span)संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ बैठक की[span_34](end_span)। [span_35](start_span)सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सौहार्दपूर्ण तरीके से (Cordial terms) पार्टी से अलग होने की इच्छा जताई[span_35](end_span)।

[span_36](start_span)

नया 'राजनीतिक आंदोलन' (A New Movement)

इस्तीफा स्वीकार होने के तुरंत बाद, अन्नामलाई ने ऐलान किया है कि वे तमिलनाडु के लोगों के लिए एक नया राजनीतिक आंदोलन (Political Movement) शुरू करेंगे[span_36](end_span)। [span_37](start_span)उनका उद्देश्य जमीनी स्तर (Grassroots engagement) पर लोगों से जुड़कर एक 'वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल' (Alternative political model) तैयार करना है[span_37](end_span)। [span_38](start_span)उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनका नया संगठन तमिलनाडु के अगले चुनावों में मजबूती से उतरेगा[span_38](end_span)।

महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQs)

Q1: के. अन्नामलाई ने भाजपा से इस्तीफा कब दिया?[span_39](start_span)

जवाब: उन्होंने 2 जून 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसे 5 जून 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया[span_39](end_span)।

Q2: अन्नामलाई को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष पद से कब हटाया गया था?[span_40](start_span)

जवाब: एआईएडीएमके (AIADMK) से गठबंधन सुधारने के लिए अप्रैल 2025 में उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को अध्यक्ष बनाया गया था[span_40](end_span)।

Q3: क्या अन्नामलाई कोई नई पार्टी बनाने वाले हैं?[span_41](start_span)

जवाब: हाँ, इस्तीफा देने के बाद उन्होंने तमिलनाडु के लोगों के लिए एक नया 'राजनीतिक आंदोलन' (Political Movement) शुरू करने की घोषणा की है, जो अगले चुनाव लड़ेगा[span_41](end_span)।

Q4: 'DMK Files' विवाद क्या था?

जवाब: अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के रिश्तेदारों और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कुछ ऑडियो क्लिप्स और दस्तावेज़ जारी किए थे, जिसे 'DMK Files' नाम दिया गया था। [span_42](start_span)इसके जवाब में DMK ने उन पर 500 करोड़ का मानहानि केस कर दिया था[span_42](end_span)।

Q5: आईपीएस अधिकारी के तौर पर अन्नामलाई को 'सिंघम' क्यों कहा जाता था?[span_43](start_span)

जवाब: जब वे कर्नाटक के उडुपी और रामनगर में एसपी (SP) थे, तब उनकी सख्त कार्यशैली, ईमानदारी और अपराधियों के खिलाफ आक्रामक रवैये के कारण उन्हें 'सिंघम' की उपाधि दी गई थी[span_43](end_span)।

निष्कर्ष (Conclusion)

के. अन्नामलाई का भाजपा से बाहर जाना पार्टी के लिए दक्षिण भारत में एक बड़ा झटका माना जा रहा है। जिस नेता ने अपने दम पर तमिलनाडु में भाजपा का वोट शेयर 11% के पार पहुँचा दिया था, उसका इस तरह अलग होना कई सवाल खड़े करता है। अन्नामलाई अब एक स्वतंत्र राजनेता के तौर पर नई शुरुआत करने जा रहे हैं। उनका यह नया राजनीतिक सफर तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में कितना सफल होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

Article By

Nitesh

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