भारतीय राजनीति के पन्नों में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। 26 मई 2014 को पहली बार देश की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जो दशकों तक अकल्पनीय माना जाता था। वे अब भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन गए हैं। इसके साथ ही, लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर सत्ता में बने रहने वाले वे जवाहरलाल नेहरू के बाद देश के पहले नेता हैं।
यह उपलब्धि केवल दिनों या वर्षों की गिनती नहीं है; यह एक ऐसे राजनीतिक सफर की कहानी है जिसने भारतीय राजनीति की दिशा, देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर भारत की तस्वीर को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। 2014 से लेकर 2026 तक का यह सफर चुनौतियों, कड़े फैसलों और बड़े बदलावों का गवाह रहा है।
राजनीतिक वर्चस्व: एक दशक से अधिक का अजेय सफर
जब 2014 में नरेंद्र मोदी ने पूर्ण बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में कदम रखा था, तब कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह एक 'लहर' है जो समय के साथ शांत हो जाएगी। लेकिन 2019 के आम चुनावों में उन्होंने और भी बड़े बहुमत के साथ वापसी की, और 2024 के चुनावों में लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर सभी राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया।
देश के लोकतांत्रिक इतिहास में यह माइलस्टोन इसलिए भी खास है क्योंकि भारत जैसे विविध और विशाल देश में एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को मात देकर इतने लंबे समय तक जनसमर्थन बनाए रखना एक करिश्मे से कम नहीं है। उन्होंने अपनी पार्टी को उत्तर भारत से निकालकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक एक मजबूत चुनावी मशीन में तब्दील कर दिया है।
प्रधानमंत्री का विजन 2047: 'विकसित भारत'
इस ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँचने के बाद, पीएम मोदी का पूरा फोकस अब 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य पर है। उनका विजन है कि जब देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे करे, तब भारत एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा हो। इसके लिए अगले कुछ वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और डिफेंस में आत्मनिर्भरता पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे की क्रांति: रेलवे और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
अगर पीएम मोदी के अब तक के कार्यकाल की सबसे बड़ी सफलता का मूल्यांकन किया जाए, तो वह है भारत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का कायाकल्प। विशेष रूप से भारतीय रेलवे में जो बदलाव पिछले 12 सालों में आए हैं, वे अभूतपूर्व हैं।
- वंदे भारत एक्सप्रेस: स्वदेशी तकनीक से बनी सेमी-हाई स्पीड 'वंदे भारत' ट्रेनों ने भारत में रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल दिया है। आज देश के कोने-कोने को ये आधुनिक ट्रेनें जोड़ रही हैं, जो समय की बचत के साथ-साथ विश्वस्तरीय सुविधाएं दे रही हैं।
- मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। जापानी शिनकानसेन (Shinkansen) तकनीक पर आधारित इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य रिकॉर्ड गति से चल रहा है, जो भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता को एक नए स्तर নেত्रत्व पर ले जाएगा।
- रेलवे का विद्युतीकरण: ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा की बचत दोनों में भारी सफलता मिली है।
डिजिटल इंडिया और आर्थिक सुधार
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। आज UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में अपनी पैठ बना चुका है। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े मॉल्स तक, डिजिटल पेमेंट भारत के जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन गया है।
जीएसटी (GST) का लागू होना, कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती, और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलों ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना दिया है। आज भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बन रहा है और विदेशी निवेश लगातार देश में आ रहा है।
वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पीएम मोदी का कार्यकाल भारत को 'बैलेंसिंग पावर' से 'लीडिंग पावर' बनाने के लिए जाना जाएगा। चाहे वह जी-20 (G20) का सफल और ऐतिहासिक आयोजन हो, चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग हो, या फिर रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के बीच भारत का स्पष्ट और स्वतंत्र रुख—भारत ने दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया है।
आज दुनिया के बड़े-बड़े नेता भारत की तरफ उम्मीद की नजरों से देखते हैं। रक्षा क्षेत्र में भी भारत अब सिर्फ एक 'आयातक' (Importer) देश नहीं रहा, बल्कि हम ब्रह्मोस, तेजस और अब एडवांस्ड इंजनों के निर्माण की ओर कदम बढ़ाते हुए 'निर्यातक' (Exporter) बनने की राह पर मजबूती से चल रहे हैं।
चुनौतियां और कड़े फैसले
यह सफर आसान नहीं था। नोटबंदी, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाना, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करना, और राम मंदिर का निर्माण—ये कुछ ऐसे फैसले थे जिन्होंने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया था। इसके अलावा सदी की सबसे बड़ी महामारी (COVID-19) का सामना करना और 100 करोड़ से ज्यादा लोगों का स्वदेशी वैक्सीन से टीकाकरण सुनिश्चित करना, उनके कार्यकाल की सबसे कठिन लेकिन सफल अग्निपरीक्षा थी।
निष्कर्ष: एक नए युग का सूत्रपात
नरेंद्र मोदी का सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बनना सिर्फ एक राजनीतिक आंकड़ा नहीं है। यह भारत के मतदाताओं के उस भरोसे का प्रतीक है जो उन्होंने एक ऐसे नेता पर जताया है, जो देश को पुरानी व्यवस्थाओं से निकालकर एक आधुनिक और शक्तिशाली राष्ट्र में बदलना चाहता है।
आलोचक उनके काम करने के तरीके पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि उनके विजन और उनकी कार्यशैली ने भारत के हर नागरिक के जीवन को किसी न किसी रूप में छुआ है। आने वाले समय में इतिहास उन्हें सिर्फ उनके लंबे कार्यकाल के लिए नहीं, बल्कि उस 'नए भारत' की नींव रखने के लिए याद करेगा, जो आज दुनिया की आंखों में आंखें डालकर बात करता है।

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