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AAP Split 2026: केजरीवाल को बड़ा झटका, राघव चड्ढा समेत 7 AAP सांसद BJP में शामिल

AAP Split 2026: अरविंद केजरीवाल को लगा सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में हुए शामिल

भारतीय राजनीति में 24 अप्रैल 2026 का दिन आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ा भूचाल लेकर आया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी माने जाने वाले नेता राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने पार्टी से बगावत कर दी है। राघव चड्ढा अपने साथ AAP के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं।

इस सियासी उलटफेर ने उच्च सदन (Rajya Sabha) में आम आदमी पार्टी की ताकत को लगभग खत्म कर दिया है। ज़्यावार्ता (Zyvarta) की इस एक्सक्लूसिव राजनीतिक रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि आखिर इन 7 सांसदों ने AAP क्यों छोड़ी और कैसे इन्होने 'दल-बदल कानून' को चकमा देकर अपनी सांसदी बचा ली।

कौन-कौन से 7 सांसद AAP छोड़कर BJP में गए?

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद थे (7 पंजाब से और 3 दिल्ली से)। इनमें से 7 सांसदों ने इस्तीफा देकर BJP के साथ 'विलय' (Merger) कर लिया है। नई दिल्ली में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में इन नामों का ऐलान किया गया:

  • 1. राघव चड्ढा (Raghav Chadha) - (AAP के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता)
  • 2. संदीप पाठक (Sandeep Pathak)
  • 3. अशोक मित्तल (Ashok Mittal)
  • 4. हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) - (पूर्व भारतीय क्रिकेटर)
  • 5. स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) - (पूर्व DCW चीफ)
  • 6. राजिंदर गुप्ता (Rajinder Gupta)
  • 7. विक्रम साहनी (Vikram Sahney)

राघव चड्ढा ने क्यों छोड़ी आम आदमी पार्टी? (असली वजह)

प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने AAP नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "जिस पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है।"

बगावत की असल जड़: यह विवाद अचानक नहीं हुआ। इसी महीने (अप्रैल 2026 की शुरुआत में), AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता (Deputy Leader) पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दे दी थी। चड्ढा ने इसे "अपमानजनक" (Wounding) बताया था। वहीं, स्वाति मालीवाल का पार्टी से रिश्ता मई 2024 में ही उस समय टूट गया था जब उन्होंने केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार पर बदसलूकी का आरोप लगाया था। चड्ढा ने कहा कि अब AAP राष्ट्रहित के बजाय निजी फायदों के लिए काम कर रही है, इसलिए उन्हें लगा कि वह "गलत पार्टी में सही इंसान" (Right man in the wrong party) थे।

'दल-बदल कानून' से कैसे बचे ये 7 सांसद? (The Masterstroke)

इस पूरी बगावत की सबसे दिलचस्प बात यह है कि किसी भी सांसद की सांसदी (सदस्यता) रद्द नहीं होगी। भारतीय संविधान के दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के अनुसार, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3rd) से कम सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाती है।

चूंकि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद थे, और इनमें से 7 सांसद (जो कि दो-तिहाई यानी 6.66 से ज्यादा हैं) एक साथ BJP में शामिल हुए हैं, इसलिए इसे 'दल-बदल' नहीं बल्कि एक 'वैधानिक विलय' (Constitutional Merger) माना गया है। इसी मास्टरस्ट्रोक के चलते इन सभी 7 सांसदों की कुर्सी सुरक्षित बच गई है।

देखिए इस मामले पर ताज़ा पोस्ट:

अरविंद केजरीवाल का पहला रिएक्शन क्या आया?

इस भारी झटके के बाद AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सिर्फ एक लाइन का रिएक्शन दिया। उन्होंने लिखा- "बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धोखा।" (The BJP has once again betrayed Punjabis)। वहीं, AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने राघव चड्ढा पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सब कुछ दिया और वो अंत में "BJP की गोद में जाकर बैठ गए।"

ज़्यावार्ता (Zyvarta) का राजनीतिक विश्लेषण

अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आम आदमी पार्टी में हुई यह टूट अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। राघव चड्ढा को पिछले पंजाब चुनावों का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था। अब राज्यसभा में AAP के 10 सांसदों की संख्या घटकर मात्र 3 रह गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा को केंद्र सरकार में क्या नई जिम्मेदारी दी जाती है।

देश की राजनीति (Geopolitics) और ब्रेकिंग ख़बरों के सबसे सटीक विश्लेषण के लिए जुड़े रहें ज़्यावार्ता के साथ।

Article By

Nitesh

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