Lenskart Controversy: 'हिजाब को छूट, बिंदी पर रोक?' मुंबई शोरूम में घुसीं BJP नेत्री, स्टाफ को खुद लगाया तिलक
शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) के जरिए हर घर में पहचाने जाने वाले पीयूष बंसल (Peyush Bansal) का आईवियर स्टार्टअप Lenskart इन दिनों एक बेहद गंभीर धार्मिक विवाद में उलझ गया है। यह पूरा मामला कंपनी के एक कथित ड्रेस कोड (Dress Code) से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने एक धर्म विशेष के प्रतीकों को मंज़ूरी दी और हिंदू आस्था के प्रतीकों को ऑफिस में पहनने पर रोक लगा दी।
इंटरनेट का यह विवाद तब एकदम से ज़मीनी प्रदर्शन में तब्दील हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) माइनॉरिटी मोर्चा की नेता नाज़िया इलाही खान अपने समर्थकों के साथ मुंबई के एक स्टोर में जा धमकीं। ज़्यावार्ता (Zyvarta) की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में हम इस पूरे 'बिंदी बनाम हिजाब' हंगामे की परतें खोलेंगे।
विवाद की असली जड़: वायरल 'ग्रूमिंग गाइड' (The Leaked HR Document)
यह सारा बखेड़ा एक 23-पेज के इंटरनल डॉक्यूमेंट (Internal HR Manual) के इंटरनेट पर लीक होने के बाद शुरू हुआ। इस गाइडलाइन्स लिस्ट में कर्मचारियों के ऑफिस आने के पहनावे को लेकर कई सख्त और अजीब नियम लिखे हुए थे:
- बिंदी और कलावे पर पाबंदी: इस गाइड में साफ़ तौर पर लिखा था कि हिंदू महिलाएं बिंदी (Bindi) लगाकर नहीं आ सकतीं। कलावा (पवित्र धागा) बांधने और यहाँ तक कि शादीशुदा औरतों को मंगलसूत्र पहनने या भारी सिंदूर लगाने पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।
- हिजाब और पगड़ी को छूट: विवाद की मुख्य वजह यह थी कि इसी सेम पॉलिसी में मुस्लिम महिलाओं के लिए काले रंग का हिजाब (Hijab) और सिखों के लिए पगड़ी (Turban) पहनकर काम करने की स्पष्ट अनुमति दी गई थी।
सोशल मीडिया पर पब्लिक ने इसे 'डबल स्टैण्डर्ड' (Double Standards) और हिंदुओं के साथ भेदभाव करार दिया, जिसके बाद कंपनी के बहिष्कार (Boycott) की मांग उठने लगी।
मुंबई के शोरूम में नाज़िया इलाही खान का हल्ला-बोल
हालात तब बेकाबू हो गए जब बीजेपी नेता नाज़िया इलाही खान मुंबई के अंधेरी स्थित Lenskart शोरूम में दाखिल हुईं। वहां उन्होंने सीधे फ्लोर मैनेजर, मोहसिन खान से तीखी बहस शुरू कर दी।
"तिलक तुम्हारा गर्व है, सनातन तुम्हारी पहचान है! काम लेंसकार्ट में करो या कहीं और... लेकिन अपने स्वाभिमान और धार्मिक पहचान से कभी समझौता मत करो।" - (वायरल वीडियो में नाज़िया इलाही खान का बयान)
नाज़िया ने मैनेजर पर सीधा आरोप लगाया कि क्या उसके खुद के धर्म (मोहसिन नाम होने) के कारण उसने हिंदू स्टाफ को उनके प्रतीक पहनने से रोका है? इसके बाद, उन्होंने खुद हिंदू कर्मचारियों को आगे बुलाया और कैमरे के सामने उनके माथे पर तिलक लगाया और कलाई पर कलावा बांधा। इस दौरान स्टोर के अंदर और बाहर काफी नारेबाजी भी हुई।
CEO पीयूष बंसल का जवाब और कंपनी का डैमेज कंट्रोल
बढ़ते दबाव और नेगेटिव पब्लिसिटी को देखते हुए Lenskart के फाउंडर पीयूष बंसल को सोशल मीडिया पर आकर पब्लिक से माफ़ी मांगनी पड़ी।
बंसल ने सफाई पेश की कि जो 23 पेज का डॉक्यूमेंट वायरल किया जा रहा है, वह असल में एक बहुत ही "आउटडेटेड" (Outdated) और गलत ट्रेनिंग मैन्युअल था। उन्होंने माना कि उसमें गलतियां थीं और उसे बहुत पहले ही कंपनी के सिस्टम से हटा दिया गया था।
विवाद को हमेशा के लिए ख़त्म करने के मकसद से कंपनी ने तुरंत एक नई 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' (In-store Style Guide) जारी की। इस नई पॉलिसी में साफ शब्दों में घोषणा की गई है कि Lenskart के दरवाज़े हर धर्म और संस्कृति के लिए खुले हैं। अब हर कर्मचारी बिना किसी डर के अपना कलावा, बिंदी, हिजाब, पगड़ी, कड़ा या मंगलसूत्र पहनकर काम कर सकता है।
ज़्यावार्ता (Zyvarta) का नज़रिया
Lenskart का यह विवाद मल्टीनेशनल ब्रांड्स और स्टार्टअप्स के लिए एक तगड़ा अलार्म है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में कोई भी कॉर्पोरेट नीति किसी एक आस्था को तरजीह और दूसरी को दबाने का काम नहीं कर सकती। पीयूष बंसल ने अपनी गलती मानते हुए नई और निष्पक्ष पॉलिसी ज़रूर लागू कर दी है, लेकिन जनता के दिमाग से 'डबल स्टैण्डर्ड' वाली उस इमेज को मिटाने में कंपनी को अभी काफी पसीना बहाना पड़ेगा।
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