India-Russia RELOS Pact: भारत में तैनात होंगे 3000 रूसी सैनिक! अमेरिका की 'पाक नीति' को दिया करारा जवाब
ग्लोबल जिओपॉलिटिक्स (Geopolitics) में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। भारत और रूस ने अपनी दोस्ती को एक ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया है, जिसकी उम्मीद पश्चिमी देशों ने सपने में भी नहीं की थी। दोनों देशों के बीच RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) एग्रीमेंट अब पूरी तरह से ऑपरेशनल हो गया है।
यह कोई आम मिलिट्री एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि इस ऐतिहासिक पैक्ट के तहत अब 3000 रशियन सैनिक (Russian Soldiers) भारत की धरती पर लंबे समय तक स्टेशन (तैनात) रह सकेंगे। ज़्यावार्ता (Zyvarta) की इस स्पेशल रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि कैसे भारत का यह कदम अमेरिका और पाकिस्तान के गठजोड़ के लिए एक 'साइलेंट' लेकिन बहुत खतरनाक मैसेज है।
RELOS पैक्ट क्या है? (3000 सैनिकों की तैनाती)
RELOS कोई साधारण मिलिट्री डील नहीं है। इस समझौते के डॉक्युमेंट्स साफ़ बताते हैं कि इसके तहत भारत और रूस एक-दूसरे की मिलिट्री फैसिलिटीज का खुलकर इस्तेमाल कर सकेंगे।
- सैनिकों और वॉरशिप्स का एक्सचेंज: इस पैक्ट के तहत एक समय में 3000 रूसी सैनिक भारत में और 3000 भारतीय सैनिक रूस में स्टेशन हो सकते हैं। इसके अलावा 5 वॉरशिप्स और ढेरों फाइटर एयरक्राफ्ट्स भी एक-दूसरे के बेस पर तैनात किए जा सकते हैं।
- शांति हो या युद्ध, पैक्ट रहेगा लागू: सबसे बड़ी बात यह है कि यह एग्रीमेंट सिर्फ पीस-टाइम (Peace-time) के लिए नहीं है, बल्कि अगर कल को कोई युद्ध छिड़ता है, तब भी यह पैक्ट पूरी तरह ऑपरेशनल रहेगा।
अमेरिका के LEMOA पैक्ट से कितना अलग और बड़ा है RELOS?
भारत ने 2018 में अमेरिका के साथ LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) साइन किया था। लेकिन RELOS उससे कई गुना ज्यादा डीप और पावरफुल है।
LEMOA के तहत अमेरिकी सैनिक या जहाज़ भारत में सिर्फ कुछ समय (जैसे एक हफ्ते) के लिए रुक सकते हैं, रिफ्यूलिंग (refueling) कर सकते हैं और उन्हें वापस जाना होता है। वे भारत में परमानेंट 'स्टेशन' नहीं हो सकते। वहीं दूसरी तरफ, रूस के साथ हुए RELOS पैक्ट में ट्रूप्स को लंबे समय तक स्टेशन करने का प्रोविजन है।
बार्टर सिस्टम (Barter System) का मास्टरस्ट्रोक: अगर रशियन सैनिक भारत में रुकते हैं, तो उनके राशन और बेस का खर्च आएगा। इस पैक्ट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस खर्चे की पेमेंट के लिए डॉलर्स की ज़रूरत नहीं है। रूस इसके बदले भारत को 'कच्चा तेल' (Crude Oil) देकर भी हिसाब चुकता कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान को भारत का 'साइलेंट रिप्लाई'
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में टाइमिंग ही सब कुछ होती है (Timing is everything)। इन दिनों वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां पाकिस्तान की तरफ सॉफ्ट होती दिख रही हैं। अमेरिका ईरान से बातचीत के लिए पाकिस्तान को एक 'थर्ड पार्टी' बना रहा है और वहां के आर्मी चीफ आसिम मुनीर को तवज्जो दे रहा है।
ऐसे समय में RELOS एग्रीमेंट का सामने आना अमेरिका के लिए भारत का एक कड़ा संदेश है। भारत ने यह साफ़ कर दिया है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान के साथ पींगे बढ़ाएगा, तो भारत ब्रिक्स (BRICS) और रूस से दूर नहीं होगा, बल्कि रशियन एलायंस को और भी मजबूत करेगा।
इंडियन नेवी के लिए गेम चेंजर: मुर्मन्स्क पोर्ट (Murmansk Port) का एक्सेस
इस डील का सबसे बड़ा फायदा इंडियन नेवी को होने वाला है। रूस ने भारत को अपने बेहद अहम मुर्मन्स्क मिलिट्री बेस (Murmansk Military Base) का सीधा एक्सेस दे दिया है।
मुर्मन्स्क बेस आर्कटिक (Arctic) रीजन यानी नॉर्थ पोल के बिल्कुल करीब है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण वहां की बर्फ पिघल रही है और नए ट्रेड रूट्स खुल रहे हैं। अभी तक वहां अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों का दबदबा था, लेकिन अब भारतीय नेवी के जंगी जहाज़ और रिसर्च वेसल्स भी सीधे आर्कटिक तक पहुंच सकेंगे, जो भारत की ग्लोबल रीच को कई गुना बढ़ा देगा।
ज़्यावार्ता (Zyvarta) का नज़रिया
भारत और रूस के बीच यह RELOS डील इस बात का सुबूत है कि भारत अब किसी भी पश्चिमी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। कल को अगर भारत पर कोई बड़ा संकट आता है या अचानक मिलिट्री सपोर्ट की ज़रूरत पड़ती है, तो भारत में तैनात ये 3000 रशियन सोल्जर्स एक बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। इसी साल व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा भी प्रस्तावित है, जिसके बाद दुनिया की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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