Global Controversy 2026: ट्रंप ने भारत और चीन को कहा 'नर्क' (Hellhole), ईरान ने किया बचाव, जानें 'ट्रेड डील' का विवाद
अमेरिकी राजनीति में अपनी वापसी के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) विवादित बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में हैं। लेकिन इस बार उन्होंने भारत और चीन को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की है, जिसने एक बड़े कूटनीतिक विवाद (Diplomatic Row) को जन्म दे दिया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Truth Social' पर एक विवादित लेटर शेयर किया है, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों को 'Hellhole' (नर्क के समान) करार दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर बेइज्जती पर जहाँ भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रतिक्रिया बेहद 'सॉफ्ट' रही है, वहीं ईरान (Iran) ने खुलकर भारत और चीन का बचाव किया है। ज़्यावार्ता (Zyvarta) की इस खास कूटनीतिक रिपोर्ट में आइए समझते हैं इस विवाद की असली जड़ और इसके पीछे छिपी अमेरिका की 'बर्थराइट सिटीजनशिप' (Birthright Citizenship) की कहानी।
'Hellhole' वाली टिप्पणी और Birthright Citizenship का विवाद
डोनाल्ड ट्रंप का यह पूरा बयान अमेरिका के इमीग्रेशन (Immigration) और 'जन्मसिद्ध नागरिकता' कानून को लेकर था। ट्रंप ने जिस लेटर का समर्थन किया है, उसमें आरोप लगाया गया है कि इमीग्रेंट्स (प्रवासी) अमेरिका आकर बच्चे पैदा करते हैं ताकि उनके बच्चों को 'बर्थराइट सिटीजनशिप' कानून के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाए।
- विवादित पोस्ट में लिखा था, "एक बच्चा यहाँ पैदा होकर तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे चीन, या भारत, या दुनिया के किसी और 'नर्क' (Hellhole) से अपने पूरे परिवार को ले आते हैं।"
- भारत और चीन की 4000 साल पुरानी प्राचीन सभ्यताओं को 'नर्क' कहना उन लाखों अप्रवासियों का सीधा अपमान है जो अमेरिका की मल्टीनेशनल कंपनियों और टेक्नोलॉजी (IT Sector) को दुनिया में सबसे आगे रखे हुए हैं।
भारत की 'सॉफ्ट' प्रतिक्रिया और बचाव में उतरा ईरान
इस बयान के वायरल होने के बाद जब भारतीय विदेश मंत्रालय से सवाल किया गया, तो भारत ने संयम बरतते हुए इस मुद्दे को तूल न देने का फैसला किया। भारत की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया कि "हम एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं।"
लेकिन, जहाँ भारत शांत रहा, वहीं ईरान (Iran) ने भारत और चीन का समर्थन करते हुए ट्रंप को करारा जवाब दिया। हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास (Consulate) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि "भारत और चीन दोनों मानव सभ्यता के पालने (Cradles of Civilization) हैं। वास्तव में नर्क (Hellhole) तो वह जगह है, जिसके 'वॉर-क्रिमिनल' राष्ट्रपति ने ईरान में सभ्यता को नष्ट करने की धमकी दी थी।"
ज़्यावार्ता (Zyvarta) का निष्कर्ष: ट्रेड डील पर अटका पेंच
भारत की खामोशी की एक बहुत बड़ी वजह अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक डील (US-India Trade Agreement) है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने कृषि (Agriculture) सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए पूरी तरह खोल दे। लेकिन भारत अपने किसानों को प्रोटेक्ट करने के लिए ऐसा करने से इनकार कर रहा है। इसी कारण अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को 'A tough nut to crack' (जिसे झुकाना मुश्किल है) कहा है।
ऐसे समय में जब भारत एक ग्लोबल सुपरपावर बनने की दिशा में बढ़ रहा है, अपने सम्मान को दरकिनार कर केवल आर्थिक समझौतों पर फोकस करना चिंता का विषय है। ईरान जैसे देश का भारत के बचाव में आना यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में दोस्त और दुश्मन के समीकरण कितनी तेजी से बदल रहे हैं।
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