तमिलनाडु में 'थलापति विजय' की सरकार या राष्ट्रपति शासन? समझें बहुमत का गणित, BJP का चाणक्य दांव और राजभवन का पूरा सस्पेंस!
दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक 'थलापति विजय' (Thalapathy Vijay) ने रुपहले पर्दे पर तो अनगिनत बार विलेन को धूल चटाई है, लेकिन असली जिंदगी की राजनीति (Real Life Politics) का क्लाइमेक्स फिल्मों से कहीं ज्यादा पेचीदा होता है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने 50 साल पुरानी द्रविड़ियन राजनीति (DMK और AIADMK का एकाधिकार) को जड़ से उखाड़ फेंका है। विजय की नई नवेली पार्टी 'तमिझागा वेत्री कड़गम' (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर इतिहास तो रच दिया, लेकिन सत्ता की चाबी (मुख्यमंत्री की कुर्सी) अभी भी उनसे कुछ कदम दूर है।
1. बहुमत का तिलिस्म: 108 बनाम 118 का फासला
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं। किसी भी पार्टी को अपनी सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत यानी 118 सीटों (Magic Number) की जरूरत होती है। विजय की TVK ने 108 सीटें जीती हैं। यानी, वे बहुमत से सिर्फ 10 सीटें दूर हैं। यही 10 सीटें इस समय भारत की राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी हैं।
विजय अपने 108 विधायकों के समर्थन के साथ दो बार राजभवन (Governor House) का दरवाजा खटखटा चुके हैं। लेकिन राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से संवैधानिक नियमों का हवाला देते हुए उन्हें बैरंग लौटा दिया। राज्यपाल का कहना है कि जब तक विजय 118 विधायकों के हस्ताक्षर (Signatures of Support) वाला पत्र नहीं सौंपते, तब तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जा सकता।
संवैधानिक नियम क्या कहते हैं? (Constitutional View)
भारत के संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 के तहत, राज्यपाल उस व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं जिसके पास सदन में बहुमत हो। यदि चुनाव पूर्व (Pre-poll) कोई गठबंधन नहीं है, तो सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया जाता है। संवैधानिक विशेषज्ञों (Constitutional Experts) के अनुसार, राज्यपाल चाहें तो विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाकर उन्हें 10 से 14 दिन के भीतर विधानसभा में 'फ्लोर टेस्ट' (Floor Test) के जरिए बहुमत साबित करने का समय दे सकते हैं।
2. क्या तमिलनाडु में लगेगा 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule)?
अगर विजय 118 का आंकड़ा नहीं जुटा पाते हैं और कोई अन्य गठबंधन (जैसे DMK या AIADMK) भी सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करता है, तो राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास संविधान के अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हालांकि, यह अंतिम विकल्प होता है। इससे पहले राज्यपाल "माइनॉरिटी गवर्नमेंट" (अल्पमत सरकार) का फॉर्मूला भी अपना सकते हैं, जहां TVK सरकार बनाएगी लेकिन उसे हर बिल पास कराने के लिए विपक्ष के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
भारतीय राजनीति में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं। 1996 के लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी को 161 सीटें मिली थीं (बहुमत 272 से बहुत दूर), तब तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने का न्योता दिया था। हालांकि वे बहुमत साबित नहीं कर पाए थे। इसी तरह 2018 में कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बुलाया गया था। विजय की पार्टी भी इसी आधार पर सरकार बनाने की मांग कर रही है।
3. गठबंधन का समीकरण: विजय को मिलेंगे वो 10 विधायक कहाँ से?
विजय के लिए राहत की बात यह है कि कांग्रेस पार्टी (जिसने 5 सीटें जीती हैं) ने बिना किसी शर्त के उन्हें समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। 108 (TVK) + 5 (Congress) = 113. अब विजय को सिर्फ 5 विधायकों की दरकार है।
यह 5 विधायक वामपंथी (Left) और दलित राजनीति करने वाले छोटे दलों से आ सकते हैं। वीसीके (VCK - विदुथलाई चिरुथिगल काची) जिसके नेता थोल. थिरुमावलवन हैं, ने 2 सीटें जीती हैं। इसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टियों— CPI (2 सीटें) और CPI(M) (2 सीटें)— का रुख भी विजय की ओर नरम दिख रहा है।
- TVK की अपनी सीटें: 108
- कांग्रेस का समर्थन: 5
- VCK (संभावित): 2
- CPI + CPI(M) (संभावित): 4
- कुल संभावित आंकड़ा: 119 (बहुमत 118 से एक ज्यादा!)
इन तीनों दलों (VCK, CPI, CPM) ने 8 मई को अपनी राज्य समितियों (State Committees) की आपातकालीन बैठक बुलाई है। अगर ये तीनों पार्टियां TVK को समर्थन देने पर मुहर लगा देती हैं, तो थलापति विजय का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा और एक नया पोस्ट-पोल अलायंस (Post-poll Alliance) जन्म लेगा।
4. BJP का 'चाणक्य दांव' और AIADMK का धर्मसंकट
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट (Twist) केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) लेकर आई है। बीजेपी किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहती कि कांग्रेस पार्टी तमिलनाडु की सत्ता में शामिल हो। अगर कांग्रेस TVK के साथ सरकार बनाती है, तो केरल की जीत के बाद दक्षिण भारत में कांग्रेस का कद बहुत बड़ा हो जाएगा, जो BJP के 2029 के लोकसभा मिशन के लिए बड़ा खतरा है।
इसलिए, बीजेपी अपनी पूर्व सहयोगी पार्टी AIADMK (जिसने 47 सीटें जीती हैं) पर जबरदस्त दबाव बना रही है कि वह बाहर से विजय (TVK) को समर्थन दे दे। बीजेपी का गेम प्लान बहुत सीधा है— "विजय मुख्यमंत्री बनें, लेकिन कांग्रेस को सरकार से बाहर रखा जाए।"
AIADMK के अंदर बगावत की स्थिति
बीजेपी के इस दांव ने AIADMK को दो फाड़ कर दिया है। एक गुट का मानना है कि सत्ता से बाहर रहने के बजाय TVK का समर्थन करके सरकार में कुछ मंत्री पद ले लिए जाएं। वहीं, पार्टी के कट्टरपंथियों का मानना है कि अगर उन्होंने विजय का समर्थन किया, तो AIADMK का अपना 50 साल पुराना कैडर और 'वोट बैंक' खिसक कर हमेशा के लिए TVK के पास चला जाएगा। यह AIADMK के लिए एक अस्तित्व का संकट (Existential Crisis) बन गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या राज्यपाल विजय को बहुमत साबित करने से रोक सकते हैं?
जवाब: राज्यपाल का काम एक स्थिर सरकार (Stable Government) बनाना है। अगर उन्हें लगता है कि विजय के पास पर्याप्त समर्थन नहीं है, तो वे पहले हस्ताक्षरित समर्थन पत्र (Letter of Support) की मांग कर सकते हैं। वे उन्हें पूरी तरह रोक नहीं सकते, बल्कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
Q2: क्या DMK और AIADMK मिलकर सरकार बना सकते हैं?
जवाब: राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। DMK (59) और AIADMK (47) को मिला लें तो उनका आंकड़ा 106 होता है, जो फिर भी 118 से कम है। इसके अलावा, ये दोनों पार्टियां वैचारिक रूप से कट्टर दुश्मन हैं, इनका साथ आना लगभग नामुमकिन है।
Q3: कांग्रेस के बिना विजय कैसे सरकार बना सकते हैं?
जवाब: अगर AIADMK अपने 47 विधायकों के साथ TVK (108) को 'बिना शर्त बाहरी समर्थन' दे दे, तो विजय के पास 155 विधायकों का भारी समर्थन हो जाएगा। इसी स्थिति को BJP अंजाम तक पहुँचाने की कोशिश कर रही है ताकि कांग्रेस को अलग-थलग किया जा सके।
निष्कर्ष (Conclusion): आगे क्या होगा?
तमिलनाडु की सत्ता कुछ विधायकों के फैसले और बंद कमरों में हो रही मीटिंग्स पर टिकी है। यह सिर्फ एक राज्य की सरकार बनने की बात नहीं है; यह इस बात की लड़ाई है कि 2029 में दक्षिण भारत पर किसका राजनीतिक नियंत्रण होगा। एक तरफ कांग्रेस है जो विजय के सहारे अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है, और दूसरी तरफ बीजेपी है जो एक अदृश्य चाणक्य की तरह पर्दे के पीछे से खेल को नियंत्रित कर रही है।
क्या थलापति विजय वामदलों और कांग्रेस के साथ मिलकर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे? या बीजेपी AIADMK के जरिए कोई बड़ा 'गेम' कर देगी? आने वाले 48 घंटे तमिलनाडु के इतिहास के सबसे रोमांचक घंटे होने वाले हैं।
Post a Comment