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TCS Nashik Case: 'कॉर्पोरेट जिहाद', 9 FIRs और Sexual Harassment की पूरी Inside Story
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Zyvarta Exclusive: TCS नासिक केस – 'कॉर्पोरेट जिहाद', सेक्शुअल हैरेसमेंट और 9 FIRs की पूरी इनसाइड स्टोरी

IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) का नासिक BPO ऑफिस इन दिनों एक ऐसी कॉन्ट्रोवर्सी (controversy) का शिकार है, जिसने कॉर्पोरेट वर्ल्ड से लेकर राजनीतिक गलियारों तक को हिला कर रख दिया है। सेक्शुअल हैरेसमेंट (sexual harassment), ग्रूमिंग (grooming), जबरन धर्मांतरण (forced religious conversion) और 'कॉर्पोरेट जिहाद' जैसे संगीन आरोप इस केस के सेंटर में हैं।

लेकिन इस पूरे मामले में आखिर सच्चाई क्या है? एक तरफ 9 FIRs और डरावने एलिगेशंस हैं, तो दूसरी तरफ आरोपियों के परिवार इसे एक 'मीडिया ट्रायल' और ऑफिस की प्रोफेशनल राइवलरी (professional rivalry) का नाम दे रहे हैं। ज़्यावार्ता (Zyvarta) की इस स्पेशल रिपोर्ट में, आइए इस हाई-प्रोफाइल केस की हर लेयर को डिटेल में समझते हैं।

क्या है पूरा मामला? (The Core Allegations)

नासिक के देवलाली कैंप और मुंबई नाका पुलिस स्टेशन्स में अब तक टोटल 9 FIRs दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें 8 लोगों को अरेस्ट किया गया है, जिसमें 7 मुस्लिम मेल एम्प्लॉइज और एक हिंदू फीमेल ऑपरेशंस मैनेजर (जो POSH कमिटी से जुड़ी थीं) शामिल हैं। आरोपियों के नाम हैं— मोहम्मद दानिश शेख, शफी बीखन शेख, रज़ा रफीक मेमन, तौसीफ अत्तार, शाहरुख कुरैशी, आसिफ आफताब अंसारी, निदा खान और अश्विनी चाईनानी। अश्विनी पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतों को इग्नोर किया।

खौफनाक हैरेसमेंट की डिटेल्स:

विक्टिम्स (victims) के स्टेटमेंट्स रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। एक नई शादीशुदा फीमेल एसोसिएट ने रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर सीरियस एलिगेशंस लगाए हैं। उसका कहना है कि उसे ऑफिस में "Player" और "Zero Figure" जैसे भद्दे नाम दिए गए। रज़ा मेमन उसके हनीमून और मैरिड लाइफ को लेकर बहुत पर्सनल और घटिया सवाल करता था।



"तुम्हारा पति पुणे में रहता है (जैसा कि आरोप में कहा गया), तुम अकेले मैनेज कैसे करती हो? अगर उसके साथ नहीं बनती तो हमें बताओ। हम तुम्हारी नीड्स पूरी करेंगे।"

एक हद तो तब पार हो गई जब गुड़ी पड़वा के दिन ऑफिस की लॉबी में रज़ा ने उस फीमेल एम्प्लॉई की साड़ी का पल्लू खींच लिया और लेव्ड (lewd) तरीके से स्माइल किया। आसिफ अंसारी पर भी आरोप है कि वह जानबूझकर महिला कर्मचारियों की थाइज़ (thighs) पर हाथ रखता था और उन्हें अनकंफर्टेबल फील कराता था।

धर्मांतरण और 'कॉर्पोरेट जिहाद' का एंगल

इस केस को जो चीज़ सबसे ज्यादा सेंसिटिव बनाती है, वह है कन्वर्जन (conversion) और हिंदू देवी-देवताओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां।

  • हिंदू देवी-देवताओं पर भद्दी बातें: तौसीफ अत्तार, निदा खान और दानिश शेख पर आरोप है कि वे लगातार हिंदू धर्म का मज़ाक उड़ाते थे। शिवलिंग को मेल सेक्शुअल ऑर्गन बताना और भगवान श्रीकृष्ण पर घटिया कमेंट्स करना इनकी आम बातें थीं।
  • जबरन नमाज़ और कलमा: एक मेल एम्प्लॉई ने आरोप लगाया है कि तौसीफ अत्तार ने ईद के दिन उसे अपने घर बुलाया, उसके सिर पर टोपी पहनाई, जबरदस्ती नमाज़ पढ़ाई, और उसकी फोटो ऑफिस ग्रुप में शेयर कर दी। उसे नॉन-वेज खाने के लिए भी फोर्स किया गया।
  • शादी का झूठा झांसा: एक 23 साल की कर्मचारी ने दानिश शेख पर आरोप लगाया है कि उसने शादी का झूठा वादा करके फिजिकल रिलेशंस बनाए। बाद में पता चला कि वह पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का बाप है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मैटर पर सीरियस कंसर्न दिखाते हुए इसे "कॉर्पोरेट जिहाद" का इशारा बताया है। पुलिस ने मामले में BNS की कई धाराओं के साथ-साथ SC/ST (Prevention of Atrocities) Act भी लगा दिया है।

आरोपियों का पक्ष: क्या ये सिर्फ एक 'मीडिया ट्रायल' है?

सिक्के का दूसरा पहलू भी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आरोपियों के परिवार वालों और वकीलों ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है।

निदा खान, जिसे मीडिया में मास्टरमाइंड और 'HR हेड' बताया जा रहा था, उसके पिता और वकील का कहना है कि निदा सिर्फ एक जूनियर एसोसिएट है। वह प्रेग्नेंट है और मुंबई में अपने घर पर ही थी। उनका सीधा सवाल है: "अगर ये जबरन धर्मांतरण का केस है, तो पुलिस ने कन्वर्जन की धारा (Dharma Swatantrya Adhiniyam, 2026) क्यों नहीं लगाई? यह सिर्फ एक मीडिया ट्रायल है।"

रज़ा मेमन के परिवार का दावा है कि वह एक टॉप परफॉर्मर था और यह पूरी कॉन्स्पिरेसी (conspiracy) ऑफिस पॉलिटिक्स का नतीजा है। साथ ही, रिपोर्ट्स बताती हैं कि 25 मार्च की आधी रात को पुलिस स्टेशन के बाहर हिंदुत्व ग्रुप्स की भारी भीड़ जमा थी। एक रात में बैक-टू-बैक 4 FIRs दर्ज होना इस बात का इशारा करता है कि केस में बाहरी प्रेशर (outside pressure) भी था।

TCS और कोर्ट का फाइनल स्टैंड

TCS ने साफ़ किया है कि उनकी वर्कप्लेस पर हैरेसमेंट के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' (Zero Tolerance Policy) है और आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की गहराई से जांच के लिए Deloitte और Trilegal को अपॉइंट किया गया है और एक इंडिपेंडेंट ओवरसाइट कमिटी भी बनाई गई है।

लेटेस्ट कोर्ट अपडेट की बात करें तो, नासिक सेशंस कोर्ट ने मुख्य आरोपी निदा खान की एंटीसिपेटरी बेल (anticipatory bail) की दरख्वास्त खारिज कर दी है, भले ही उसकी मेडिकल कंडीशन का हवाला दिया गया था। अब इस केस की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।

ज़्यावार्ता (Zyvarta) का निष्कर्ष

TCS नासिक का यह केस अब सिर्फ एक कॉर्पोरेट ऑफिस की घटना नहीं रह गया है। यह वर्कस्पेस सेफ्टी, रिलीजियस पॉलिटिक्स और मीडिया रिपोर्टिंग के तरीकों पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या वाकई वहां एक 'ग्रूमिंग गैंग' काम कर रहा था, या फिर यह ऑफिस की दुश्मनी को मज़हबी रंग देने की कोशिश है? सच चाहे जो भी हो, इस इंसिडेंट ने IT सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं को चिंता में डाल दिया है। पुलिस की SIT जांच और 27 अप्रैल की कोर्ट हियरिंग से ही असली तस्वीर साफ़ होगी।

TCS नासिक केस की आगे की हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए जुड़े रहिए Zyvarta के साथ।

Article By

Nitesh

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